Song of Solomon (Hindi)
1
1:1b.SON.001.001 श्रेष्ठगीत जो सुलैमान का है।।
1:2b.SON.001.002 वह अपने मुंह के चुम्बनों से मुझे चूमे! क्योंकि तेरा प्रेम दाखमधु से उत्तम है,
1:3b.SON.001.003 तेरे भांति भांति के इत्रों का सुगन्ध उत्तम है, तेरा नाम उंडेले हुए इत्रा के तुल्य है; इसीलिये कुमारियां तुझ से प्रेम रखती हैं
1:4b.SON.001.004 मुझे खींच ले; हम तेरे पीछे दौड़ेंगे राजा मुझे अपने महल में ले आया है। हम तुझ में मगन और आनन्दित होंगे; हम दाखमधु से अधिक तेरे प्रेम की चर्चा करेंगे; वे ठीक ही तुझ से प्रेम रखती हैं।।
1:5b.SON.001.005 हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं काली तो हूं परन्तु सुन्दर हूं, केदार के तम्बुओं के और सुलैमान के पर्दों के तुल्य हूं।
1:6b.SON.001.006 मुझे इसलिये न घूर कि मैं साँवली हूं, क्योंकि मैं धूप से झुलस गई। मेरी माता के पुत्रा मुझ से अप्रसन्न थे, उन्हों ने मुझ को दाख की बारियों की रखवालिन बनाया; परन्तु मैं ने अपनी निज दाख की बारी की रखवाली नहीं की!
1:7b.SON.001.007 हे मेरे प्राणप्रिय मुझे बता, तू अपनी भेड़- बकरियां कहां चराता है, दोपहर को तू उन्हें कहां बैठाता है; मैं क्यों तेरे संगियों की भेड़- बकरियों के पास घूंघट काढ़े हुए भटकती फिरूं?
1:8b.SON.001.008 हे स्त्रियों में सुन्दरी, यदि तू यह न जानती हो तो भेड़- बकरियों के खुरों के चिन्हों पर चल और चरावाहों के तम्बुओं के पास अपनी बकरियों के बच्चों को चरा।।
1:9b.SON.001.009 हे मेरी प्रिय मैं ने तेरी तुलना फिरौन के रथों में जुती हुई घोड़ी से की है।
1:10b.SON.001.010 तेरे गाल केशों के लटों के बीच क्या ही सुन्दर हैं, और तेरा कण्ठ हीरों की लड़ों के बीच।
1:11b.SON.001.011 हम तेरे लिये चान्दी के फूलदार सोने के आभूषण बनाएंगे।
1:12b.SON.001.012 जब राजा अपनी मेज के पास बैठा था मेरी जटामासी की सुगन्ध फैल रही थी।
1:13b.SON.001.013 मेरा प्रेमी मेरे लिये लोबान की थैली के समान है जो मेरी छातियों के बीच में पड़ी रहती है।।
1:14b.SON.001.014 मेरा प्रमी मेरे लिये मेंहदी के फूलों के गुच्छे के समान है, जो एनगदी की दाख की बारियों में होता है।।
1:15b.SON.001.015 तू सुन्दरी है, हे मेरी प्रिय, तू सुन्दरी है; तेरी आंखें कबूतरी की सी हैं।
1:16b.SON.001.016 हे मेरी प्रिय तू सुन्दर और मनभावनी है। और हमारा बिछौना भी हरा है;
1:17b.SON.001.017 हमारे घर के बरगे देवदार हैं और हमारी छत की कड़ियां सनौवर हैं।।
2
2:1b.SON.002.001 मैं शारोन देश का गुलाब और तराइयों में का सोसन फूल हूं।।
2:2b.SON.002.002 जैसे सोसन फूल कटीले पेड़ों के बीच वैसे ही मेरी प्रिय युवतियों के बीच में है।।
2:3b.SON.002.003 जैसे सेब के वृक्ष जंगल के वृक्षों के बीच में, वैसे ही मेरा प्रेमी जवानों के बीच में है। मैं उसकी छाया में हर्षित होकर बैठ गई, और उसका फल मुझे खाने मे मीठा लगा।
2:4b.SON.002.004 वह मुझे भोज के घर में ले आया, और उसका जो झन्डा मेरे ऊपर फहराता था वह प्रेम था।
2:5b.SON.002.005 मुझे सूखी दाखों से संभालो, सेब खिलाकर बल दो: क्योंकि मैं प्रेम में रोगी हूूं।
2:6b.SON.002.006 काश, उसका बायां हाथ मेरे सिर के नीचे होता, और अपने दहिने हाथ से वह मेरा आलिंगन करता!
2:7b.SON.002.007 हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम से चिकारियों और मैदान की हरिणियों की शपथ धराकर कहती हूं, कि जब तक प्रेम आप से न उठे, तब तक उसको न उसकाओ न जगाओ।।
2:8b.SON.002.008 मेरे प्रेमी का शब्द सुन पड़ता है! देखो, वह पहाड़ों को फान्दता हुआ आता है।
2:9b.SON.002.009 मेरा प्रेमी चिकारे वा जवान हरिण के समान है। देखो, वह हमारी भीत के पीछे खड़ा है, और खिड़कियों की ओर ताक रहा है, और झंझरी में से देख रहा है।
2:10b.SON.002.010 मेरा प्रेमी मुझ से कह रहा है, हे मेरी प्रिय, हे मेरी सुन्दरी, उठकर चली आ;
2:11b.SON.002.011 क्योंकि देख, जाड़ा जाता रहा; वर्षा भी हो चुकी और जाती रही है।
2:12b.SON.002.012 पृथ्वी पर फूल दिखाई देते हैं, चिड़ियों के गाने का समय आ पहुंचा है, और हमारे देश में पिन्डुक का शब्द सुनाई देता है।
2:13b.SON.002.013 अंजीर पकने लगे हैं, और दाखलताएं फूल रही हैं; वे सुगन्ध दे रही हैं। हे मेरी प्रिय, हे मेरी सुन्दरी, उठकर चली आ।
2:14b.SON.002.014 हे मेरी कबूतरी, पहाड़ की दरारों में और टीलों के कुज्ज में तेरा मुख मुझे देखने दे, तेरा बोल मुझे सुनने दे, क्योंकि तेरा बोल मीठा, और तेरा मुख अति सुन्दर है।
2:15b.SON.002.015 जो छोटी लोमड़ियां दाख की बारियों को बिगाड़ती हैं, उन्हें पकड़ ले, क्योंकि हमारी दाख की बारियों में फूल लगे हैं।।
2:16b.SON.002.016 मेरा प्रमी मेरा है और मैं उसकी हूं, वह अपनी भेड़- बकरियों सोसन फूलों के बीच में चराता है।
2:17b.SON.002.017 जब तक दिन ठण्डा न हो और छाया लम्बी होते होते मिट न जाए, तब तक हे मेरे प्रेमी उस चिकारे वा जवान हरिण के समान बन जो बेतेर के पहाड़ों पर फिरता है।
3
3:1b.SON.003.001 रात के समय में अपने पलंग पर अपने प्राणप्रिय को ढूंढ़ती रही; मैं उसे ढूंढ़ती तो रही, परन्तु उसे न पाया; मैं ने कहा, मैं अब उठकर नगर में,
3:2b.SON.003.002 और सड़कों और चौकों में घूमकर अपने प्राणप्रिय को ढूंढूंगी। मैं उसे ढूंढती तो रही, परन्तु उसे न पाया।
3:3b.SON.003.003 जो पहरूए नगर में घूमते थे, वे मुझे मिले, मैं ने उन से पूछा, क्या तुम ने मेरे प्राणप्रिय को देखा है?
3:4b.SON.003.004 मुझ को उनके पास से आगे बढ़े थोड़े ही देर हुई थी कि मेरा प्राणप्रिय मुझे मिल गया। मैं ने उसको पकड़ लिया, और उसको जाने न दिया जब तक उसे अपनी मात के घर अर्थात् अपनी जननी की कोठरी में न ले आई।।
3:5b.SON.003.005 हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम से चिकारियों और मैदान की हरिणियों की शपथ धराकर कहती हूं, कि जब तक प्रेम आप से न उठे, तब तक उसको न उसकाओ और न जगाओ।।
3:6b.SON.003.006 यह क्या है जो धूएं के खम्भे के समान, गन्धरस और लोबान से सुगन्धित, और व्योपारी की सब भांति की बुकनी लगाए हुए जंगल से निकला आता है?
3:7b.SON.003.007 देखो, यह सुलैमान की पालकी है! उसके चारों ओर इस्राएल के शूरवीरों में के साठ वीर चल रहे हैं।
3:8b.SON.003.008 वे सब के सब तलवार बान्धनेवाले और युद्ध विद्या में निपुण हैं। प्रत्येक पुरूष रात के डर से जांघ पर तलवार लटकाए रहता है।
3:9b.SON.003.009 सुलैमान राजा ने अपने लिये लबानोन के काठ की एक बड़ी पालकी बनावा ली।
3:10b.SON.003.010 उस ने उसके खम्भे चान्दी के, उसका सिरहाना सोने का, और गद्दी अर्गवानी रंग की बनवाई हे; और उसके बीच का स्थान यरूशलेम की पुत्रियों की ओर से बड़े प्रेम से जड़ा गया है।
3:11b.SON.003.011 हे सिरयोन की पुत्रियों निकलकर सुलैमान राजा पर दृष्टि डालो, देखो, वह वही मुकुट पहिने हुए है जिसे उसकी माता ने उसके विवाह के दिन और उसके मन के आनन्द के दिन, उसके सिर पर रखा था।।
4
4:1b.SON.004.001 हे मेरी प्रिय तू सुन्दर है, तू सुन्दर है! तेरी आंखें तेरी लटों के बीच में कबूतरों की सी दिखाई देती है। तेरे बाल उन बकरियों के झुण्ड के समान हैं जो गिलाद पहाड़ के ढाल पर लेटी हुई हों।
4:2b.SON.004.002 तेरे दान्त उन ऊन कतरी हुई भेड़ों के झुण्ड के समान हैं, जो नहाकर ऊपर आईं हों, उन में हर एक के दो दो जुड़वा बच्चे होते हैं। और उन में से किसी का साक्षी नहीं मरा।
4:3b.SON.004.003 तेरे होंठ लाल रंग की डोरी के समान हैं, और तेरा मुंह मनोहर है, तेरे कपोल तेरी लटों के नीचे अनार की फाँक से देख पड़ते हैं।
4:4b.SON.004.004 तेरा गला दाऊद के गुम्मट के समान है, जो अस्त्रा- शस्त्रा के लिये बना हो, और जिस पर हजार ढालें टंगी हुई हों, वे सब ढालें शूरवीरों की हैं।
4:5b.SON.004.005 तेरी दोनों छातियां मृग के दो जुड़वे बच्चों के तुल्य हैं, जो सोसन फूलों के बीच में चरते हों।
4:6b.SON.004.006 जब तक दिन ठण्डा न हो, और छाया लम्बी होते होते मिट न जाए, तब तक मैं शीघ्रता से गन्धरस के पहाड़ और लोबान की पहाड़ी पर चला जाऊंगा।
4:7b.SON.004.007 हे मेरी प्रिय तू सर्वांग सुन्दरी है; तुझ में कोई दोष नहीं।
4:8b.SON.004.008 हे मेरी दुल्हिन, तू मेरे संग लबानोन से, मेरे संग लबानोन से चली आ। तू आमाना की चोटी पर से, शनीर और हेर्मोन की चोटी पर से, सिहों की गुफाओं से, चितों के पहाड़ों पर से दृष्टि कर।
4:9b.SON.004.009 हे मेरी बहिन, हे मेरी दुल्हिन, तू ने मेरा मन मोह लिया है, तू ने अपनी आंखों की एक ही चितवन से, और अपने गले के एक ही हीरे से मेरा हृदय मोह लिया है।
4:10b.SON.004.010 हे मेरी बहिन, हे मेरी दुल्हिन, तेरा प्रेम क्या ही मनोहर है! तेरा प्रेम दाखमधु से क्या ही उत्तम है, और तेरे इत्रों का सुगन्ध इस प्रकार के मसालों के सुगन्ध से!
4:11b.SON.004.011 हे मेरी दुल्हिन, तेरे होठों से मधु टपकता है; तेरी जीभ के नीचे मधु ओर दूध रहता है; तेरी जीभ के नीचे मधु और दूध रहता है; तेरे वस्त्रों का सुगन्ध लबानोन का सा है।
4:12b.SON.004.012 मेरी बहिन, मेरी दुल्हिन, किवाड़ लगाई हुई बारी के समान, किवाड़ बन्द किया हुआ सोता, ओर छाप लगाया हुआ झरना है।
4:13b.SON.004.013 तेरे अंकुर उत्तम फलवाली अनार की बारी के तुल्य है, जिस में मेंहदी और सुम्बुल,
4:14b.SON.004.014 जटामासी और केसर, लोबान के सब भांति के पेड़, मुश्क और दालचीनी, गन्धरस, अगर, आदि सब मुख्य मुख्य सुगन्धद्रव्य होते हैं।
4:15b.SON.004.015 तू बारियों का सोता है, फूटते हुए जल का कुआँ, और लबानोन से बहती हुई धाराएं हैं।।
4:16b.SON.004.016 हे उत्तर वायु जाग, और हे दक्खिनी वायु चली आ! मेरी बारी पर बह, जिस से उसका सुगन्ध फैले। मेरा प्रेमी अपनी बारी में आये, और उसके उत्तम उत्तम फल खाए।।
5
5:1b.SON.005.001 हे मेरी बहिन, हे मेरी दुल्हिन, मैं अपनी बारी में आया हूं, मैं ने अपना गन्धरस और बलसान चुन लिया; मैं ने मधु समेत छत्ता खा लिया, मैं ने दूध और दाखमधु भी लिया।। हे मित्रों, तुम भी खाओ, हे प्यारों, पियो, मनमाना पियो!
5:2b.SON.005.002 मैं मोती थी, परन्तु मेरा मन जागता था। सुन! मेरा प्रेमी खटखटाता है, और कहता है, हे मेरी बहिन, हे मेरी प्रिय, हे मेरी कबूतरी, हे मेरी निर्मल, मेरे लिये द्वार खोल; क्योंकि मेरा सिर ओस से भरा है, और मेरी लटें रात में गिरी हुई बून्दों से भीगी हैं।
5:3b.SON.005.003 मैं अपना वस्त्रा उतार चुकी थी मैं उसे फिर कैसे पहिनूं? मैं तो अपने पांव धो चुकी थी अब उनको कैसे मैला करूं?
5:4b.SON.005.004 मेरे प्रेमी ने अपना हाथ किवाड़ के छेद से भीतर डाल दिया, तब मेरा हृदय उसके लिये उभर उठा।
5:5b.SON.005.005 मैं अपने प्रेमी के लिये द्वार खोलने को उठी, और मेरे हाथों से गन्धरस टपका, और मेरी अंगुलियों पर से टपकता हुआ गन्धरस बेण्डे की मूठों पर पड़ा।
5:6b.SON.005.006 मैं ने अपने प्रेमी के लिये द्वार तो खोला परन्तु मेरा प्रेमी मुड़कर चला गया था। जब वह बोल रहा था, तब मेरा प्राण घबरा गया था मैं ने उसको ढूंढ़ा, परन्तु न पाया; मैं ने उसको पुकारा, परन्तु उस ने कुछ उत्तर न दिया।
5:7b.SON.005.007 पहरेवाले जो नगर में घूमते थे, मुझे मिले, उन्हों ने मुझे मारा और घायल किया; शहरपनाह के पहरूओं ने मेरी च र मुझ से छीन ली।
5:8b.SON.005.008 हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम को शपथ धराकर कहती हूं, यदि मेरा प्रेमी तुमको मिल जाए, तो उस से कह देना कि में प्रेम में रोगी हूं।
5:9b.SON.005.009 हे स्त्रियों में परम सुन्दरी तेरा प्रेमी और प्रेमियों से किस बात में उत्तम है? तू क्यों हम को ऐसी शपथ धराती है?
5:10b.SON.005.010 मेरा प्रेमी गोरा और लाल सा है, वह दस हजार में उत्तम है।
5:11b.SON.005.011 उसका सिर चोखा कुन्दन है; उसकी लटकती हुई लटें कौवों की नाई काली हैं।
5:12b.SON.005.012 उसकी आंखें उन कबूतरों के समान हैं जो दुध में नहाकर नदी के किनारे अपने झुण्ड में एक कतार से बैठे हुए हों।
5:13b.SON.005.013 उसके गाल फूलों की फुलवारी और बलसान की उभरी हुई क्यारियां हैं। उसके होंठ सोसन फूल हैं जिन से पिघला हुआ गन्धरस टपकता है।।
5:14b.SON.005.014 उसके हाथ फीरोजा जड़े हुए सोने के किवाड़ हैं। उसका शरीर नीलम के फूलों से जड़े हुए हाथीदांत का काम है।
5:15b.SON.005.015 उसके पांव कुन्दन पर बैठाये हुए संगमर्मर के खम्भे हैं। वह देखने में लबानोन और सुन्दरता में देवदार के वृक्षों के समान मनोहर है।
5:16b.SON.005.016 उसकी वाणी अति मधुर है, हां वह परम सुन्दर है। हे यरूशलेम की पुत्रियो, यही मेरा प्रेमी और यही मेरा मित्रा है।।
6
6:1b.SON.006.001 हे स्त्रियों में परम सुन्दरी, तेरा प्रेमी कहां गया? तेरा प्रेमी कहां चला गया कि हम तेरे संग उसको ढूंढने निकलें?
6:2b.SON.006.002 मेरा प्रेमी अपनी बारी में अर्थात् बलसान की क्यारियों की ओर गया है, कि बारी में अपनी भेड़- बकरियां चराए और सोसन फूल बटोरे।
6:3b.SON.006.003 मैं अपने प्रेमी की हूं और मेरा प्रेमी मरा है, वह अपनी भेड़- बकरियां सोसन फूलों के बीच चराता है।
6:4b.SON.006.004 हे मेरी प्रिय, तू तिर्सा की नाई सुन्दरी है तू यरूशलेम के समान रूपवान है, और पताका फहराती हुई सेना के तुल्य भयंकर है।
6:5b.SON.006.005 अपनी आंखें मेरी ओर से फेर ले, क्योंकि मैं उन से घबराता हूं; तेरे बाल ऐसी बकरियों के झुण्ड के समान हैं, जो गिलाद की ढलान पर लेटी हुई देख पड़ती हों।
6:6b.SON.006.006 तेरे दांत ऐसी भेड़ों के झुण्ड के समान हैं जिन्हें स्नान कराया गया हो, उन में प्रत्येक दो दो जुड़वा बच्चे देती हैं, जिन में से किसी का साथी नहीं मरा।
6:7b.SON.006.007 तेरे कपोल तेरी लटों के नीचे अनार की फाँक से देख पड़ते हैं।
6:8b.SON.006.008 वहां साठ रानियां और अस्सी रखेलियां और असंख्य कुमारियां भी हैं।
6:9b.SON.006.009 परन्तु मेरी कबूतरी, मेरी निर्मल, अद्वैत है अपनी माता की एकलौती अपनी जननी की दुलारी है। पुत्रियों ने उसे देखा और धन्य कहा; रानियों और रखेलियों ने देखकर उसकी प्रशंसा की।
6:10b.SON.006.010 यह कौन है जिसकी शोभा भोर के तुल्य है, जो सुन्दरता में चन्द्रमा और निर्मलता में सूर्य और पताका फहराती हुई सेना के तुल्य भयंकर दिखाई पड़ती है?
6:11b.SON.006.011 मैं अखरोट की बारी में उत्तर गई, कि तराई के फूल देखूं, और देखूं की दाखलता में कलियें लगीं, और अनारों के फूल खिले कि नहीं।
6:12b.SON.006.012 मुझे पता भी न था कि मेरी कल्पना ने मुझे अपने राजकुमार के रथ पर चढ़ा दिया।।
6:13b.SON.006.013 लौट आ, लौट आ, हे शूलम्मिन, लौट आ, लौट आ, कि हम तुझ पर दृष्टि करें।। क्या तुम शूलेम्मिन को इस प्रकार देखोगे जैसा महनैम के नृत्य को देखते हो?
7
7:1b.SON.007.001 हे कुलीन की पुत्री, तेरे पांव जूतियों में क्या ही सुन्दर हैं! तेरी जांघों की गोलाई ऐसे गहनों के समान है, जिसको किसी निपुण कारीगर ने रचा हो।
7:2b.SON.007.002 तेरी नाभि गोल कटोरा है, जो मसाला मिले हुए दाखमधु से पूर्ण हो तेरा पेट गेहूं के ढेर के समान है जिसके चहुँओर सोसन फूल हों।
7:3b.SON.007.003 तेरी दोनों छातियां मृगनी के दो जुड़वे बच्चों के समान हैं।
7:4b.SON.007.004 तेरा गला हाथीदांत का गुम्मट है। तेरी आंखें हेशबोन के उन कुन्डों के समान हैं, जो बत्राब्बीम के फाटक के पास हैं। तेरी नाक लबानोन के गुम्मट के तुल्य है, जिसका मुख दमिश्क की ओर है।
7:5b.SON.007.005 तेरा सिर तुझ पर कर्मेल के समान शोभायमान है, और तेरे सर की लटें अर्गवानी रंग के वस्त्रा के तुल्य है; राजा उन लआओं में बंधुआ हो गया है।
7:6b.SON.007.006 हे प्रिय और मनभावनी कुमारी, तू कैसी सुन्दर और कैसी मनोहर है!
7:7b.SON.007.007 तेरा डील डौल खजूर के समान शानदार है और तेरी छातियां अंगूर के गुच्छों के समान हैं।।
7:8b.SON.007.008 मैं ने कहा, मैं इस खजूर पर चढ़कर उसकी डालियों को पकडूंगा। तेरी छातियां अंगूर के गुच्छे हो, और तेरी श्वास का सुगन्ध सेबों के समान हो,
7:9b.SON.007.009 और तेरे चुम्बन उत्तम दाखमधु के समान हैं जो सरलता से ओठों पर से धीरे धीरे बह जाती है।।
7:10b.SON.007.010 मैं अपनी प्रेमी की हूं। और उसकी लालसा मेरी ओर नित बनी रहती है।
7:11b.SON.007.011 हे मेरे प्रेमी, आ, हम खेतों में निकल जाएं और गांवों में रहें;
7:12b.SON.007.012 फिर सबेरे उठकर दाख की बारियों में चलें, और देखें कि दाखलता में कलियें लगी हैं कि नहीं, कि दाख के फूल खिलें हैं या नहीं, और अनार फूले हैं वा नहीं वहां मैं तुझ को अपना प्रेम दिखाऊंगी।
7:13b.SON.007.013 दोदाफलों से सुगन्ध आ रही है, और हमारे द्वारों पर सब भांति के उत्तम फल हैं, नये और पुराने भी, जो, हे मेरे प्रेमी, मैं ने तेरे लिये इकट्ठे कर रखे हैं।।
8
8:1b.SON.008.001 भला होता कि तू मेरे भाई के समान होता, जिस ने मेरी माता की छातियों से दूध पिया! तब मैं तुझे बाहर पाकर तेरा चुम्बन लेती, और कोई मेरी निन्दा न करता।
8:2b.SON.008.002 मैं तुझ को अपनी माता के घर ले चलती, और वह मुझ को सिखाती, और मैं तुझे मसाला मिला हुआ दाखमघु, और अपने अनारों का रस पिलाती।
8:3b.SON.008.003 काश, उसका बायां हाथ मेरे सिर के नीचे होता, और अपने दहिने हाथ से वह मेरा आलिंगन करता!
8:4b.SON.008.004 हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम को शपथ धराती हूं, कि तुम मेरे प्रेमी को न जगाना जब तक वह स्वयं न उठना चाहे।।
8:5b.SON.008.005 यह कौन है जो अपने प्रेमी पर टेक लगाये हुए जंगल से चली आती है? सेब के पेड़ के नीचे मैं ने तुझे जगया। वहां तेरी माता ने तुझे जन्म दिया वहां तेरी माता को पीड़ाएं उठीं।।
8:6b.SON.008.006 मुझे नगीने की नाईं अपने हृदय पर लगा रख, और ताबीज की नाई अपनी बांह पर रख; क्योंकि प्रेम मृत्यु के तुल्य सामर्थी है, और ईर्षा कब्र के समान निर्दयी है। उसकी ज्वाला अग्नि की दमक है वरन परमेश्वर ही की ज्वाला है।
8:7b.SON.008.007 पानी की बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता, और न महानदों से डूब सकता है। यदि कोई अपने घर की सारी सम्पत्ति प्रेम की सन्ती दे दे तौभी वह अत्यन्त तुच्छ ठहरेगी।।
8:8b.SON.008.008 हमारी एक छोटी बहिन है, जिसकी छातियां अभी नहीं उभरी। जिस दिन हमारी बहिन के ब्याह की बात लगे, उस दिन हम उसके लिये क्या करें?
8:9b.SON.008.009 यदि वह शहरपनाह हो तो हम उस पर चान्दी का कंगूरा बनाएंगे; और यदि वह फाटक का किवाड़ हो, तो हम उस पर देवदारू की लकड़ी के पटरे लगाएंगे।।
8:10b.SON.008.010 मैं शहरपनाह थी और मेरी छातियां उसके गुम्मट; तब मैं अपने प्रेमी की दृष्टि में शान्ति लानेवाले के नाईं थी।।
8:11b.SON.008.011 बाल्हामोन में सुलैमान की एक दाख की बारी थी; उस ने वह दाख की बारी रखवालों को सौंप दी; हर एक रखवाले को उसके फलों के लिये चान्दी के हजार हजार टुकड़े देने थे।
8:12b.SON.008.012 मेरी निज दाख की बारी मेरे ही लिये है; हे सुलैमान, हजार तुझी को और फल के रखवालों को दो सौ मिलें।।
8:13b.SON.008.013 तू जो बारियों में रहती है, मेरे मित्रा तेरा बोल सुनना चाहते हैं; उसे मुझे भी सुनने दे।।
8:14b.SON.008.014
8:15b.SON.008.015 हे मेरे प्रेमी, शीघ्रता कर, और सुगन्धद्रव्यों के पहाड़ों पर चिकारे वा जवान हरिण के नाई बन जा।।
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